गुजरात में नवरात्री सबसे रंगीन त्यौहार है। अक्तूबर में यह त्यौहार नौ रत मनाया जाता है। पिछले दिन दसरा कहा जाता है। एक दिन पहले लोग गॉव का कटरे और मन्दिर में आते हैं। वे गाते और नाचते है तक सुबह पूर्व। त्यौहार के समय देवी माँ का पूजा किया जाता है। जब कारीगर उनके बाजे का पूजा करते है, कृषक उनके हल, योदा उनके आयुध, और छात्र उनके किताबें तब त्यौहार समत्प करता है। नवरात्री त्यौहार पक्षात के नजदीक है। यह दिन शरद परनीमा कहा जाता है। चंद उजाला के निचे लोग चावल खाते और दूध पीते हैं। गुजरात में देवी माँ के बारे में सबसे प्रचलित मंदिर अम्बा माता और बेचार्जी माता हैं। नवरात्री दिनों में लोग ये मंदिर घुमने जाते हैं और गुजराती लोक नाटक आनंद लेते हैं।
Sunday, 5 April 2009
रक्षा बंधन
रक्षा बंधन के बारे में, एक कहानी है। बहुत हज़ार साल पहले, देवते और भूत बैर में जगड़ाते थे। देवते के रजा, इन्द्रा, बैर के बारे में बहुत परेशानी लगता था। उसकी पत्नी, इन्द्राणी, बहुत चिंतू हुई, तो उसने एक जादू बनाकर इन्द्रा की दाये कलाई पर बांधा। जादू ने इन्द्रा भूत से बचाया।
रक्षा बंधन अगस्त में मनाई जाती है। राखी का दिन में, सब भाई और बहने सुबह को उठते हैं। वे नये कपड़े पहनते हैं। भाई अक्सर कुर्ता पहनते हैं और बेहेने सलवार-कुर्ता या साड़ियाँ पहनती हैं। बहने राखी के लिए एक थाली को सजाती हैं। उसपर, रोली (तिलक के लिए), अक्षत, दिया या दीपक (भाई की आरती के लिए), मिठाईयाँ और राखी। पहले, बहने अपने भाईयो के माथे पर तिलक लगाती हैं। इस के बाद, तिलक पर कुछ अक्षत लगाती हैं। फिर वे आरती करके अपने भाईयो की कलाईयाँ पर राखी बांधती हैं। ये राखियाँ बहुत सुंदर और रंगीला हैं। मेरे बहने नही है लेकिन मेरे कुछ भाई-बहन और दोस्त मुझे राखियाँ देती हैं।
राखी बांधने के बाद, बहने अपने भाईयो को मिठाईयाँ देती हैं। फिर, भाई अपनी बहने को कुछ तोहफे देते हैं। अक्सर तोहफे पैसे हैं। भाई और बहनों दोनों को लंबा जीवन, सफलता, प्रताप और तबीयत के लिए इच्छा करते हैं। सब भाई और बहने अपने रिश्तेदारो के घर जाती हैं और नमस्कार अदला बदला करते हैं।
Ugadi
उगादी आंध्र प्रदेश में यह दिन नया वर्ष मनाया जाता है। यह हिंदू कैलेंडर में चैत्र मॉस में होता है। यह अंग्रेज़ी कैलेंडर में मार्च और अप्रैल होता है। इस्सी समय पर स्प्रिंग शुरू होता है- बोहुत जस्मीन फूल आते हैं। लोग मानते हैं की स्प्रिंग वर्ष का सबसा पहला सीज़न हैं क्योंकि नया फूल, औजार, औउर धरती पर नया जीवन आता है। नया जीवन और नया वर्ष एक साथ शुरू होते हैं। लोग सोचते हैं की इस दिन पर, भगवान् भरमा ने 'क्रेअशन' शुरू किया। इस दिन पर यह युग, कलि युग, शुरू हुआ। लोग यह भी मनाते हैं किड इस दिन पर कृष्ण ने अपना शरीर प्रबहत्सा में कुर्बानी किया।
उगादी से एक हफ्ता पहले लोग अपने घर को साफ़ करते हैं, और नया-नया कपड़े खरीदते है। उगादी दिन पर, धुप आने से पहले, लोग नहाते हैं, और अपने घर के दरवाज़े पर आम का पता रखते हैं। उगादी पच्चादी बनाया जाता है- जिस के मतलब है की जीवन में अच्छा औउर बरह दोनों है। लोग कविता भी एक दूसरे को बोलते हैं।
उगादी से एक हफ्ता पहले लोग अपने घर को साफ़ करते हैं, और नया-नया कपड़े खरीदते है। उगादी दिन पर, धुप आने से पहले, लोग नहाते हैं, और अपने घर के दरवाज़े पर आम का पता रखते हैं। उगादी पच्चादी बनाया जाता है- जिस के मतलब है की जीवन में अच्छा औउर बरह दोनों है। लोग कविता भी एक दूसरे को बोलते हैं।
लोहरी

पुनजब में लोग लोहरी बनाते हैं। हर साल, लोहरी जनवरी में होती है जब पुनजब के खेतों में काफी गेहूं भरा होता है। लोहरी अक्सर बाहर मनाई जाती है। बाहर लोग एक साथ मिलकर अलाव के पास शाम को बैठाते हैं। लोहरी के दिन बच्चे गाना गाते हुए एक घर से दुसरे घर जाते हैं। बच्चे दूल्हा भट्टी के गाने गाते हैं। दूल्हा भट्टी एक चोर था जो गरीब लोगो की मदद करता था और उनकी अधिकारों के लिए लुरता था। यह गाना गाने वाले बचों को लोगों से मिठाई मिलती है और कभी कभी उनको पैसे भी मिलते हैं। जो सब कुछ बच्चों को मिलता है, उसको लोहरी कहते हैं और यह सब कुछ लोहरी के रात बांटा जाता है।
रात को मूँगफली और फुलिया आग में फेंक जाते हैं अग्नि के लिया, जो एक आग का भगवन है। लोहरी में लोग अग्नि को पूजा करते हैं अलाव के पास और परसाद बनते हैं। परसाद पाँच चीजों से बना होता है -- मूँगफली, फुलिया, गचुक, तिल, और गुर। पंजाबी लोग अपने घरों मे लोहरी बनाते हैं। घर पर लोग काफी रंगीन कपड़े पहनाते हैं और नाचते हैं । लोग काफी भंगरा और गीधा करते हैं।
नवरात्रि
नवरात्रि एक हिंदू त्यौहार है। नवरात्रि संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है नौ रातें। यह त्यौहार साल में दो बार आता है। एक शरद नवरात्रि, दूसरा है बसन्त नवरात्रि। नवरात्रि के नौ रातो में तीन हिंदु देवियों पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ में स्वरुपों पुजा होती है जिन्हे नवदुर्गा कहते हैं। नवरात्रि वर्ष में दो बार आते हैं - चत्र मास में और क्वार या आश्विन मास में।
नवरात्रि पुरे भारतीय में मनाई जथा है। सब लोग शक्ति की पूजा करते हैं। जो भी अप्पको चन्हिया वह भगवान् शक्ति दे सकती हैं । वे सबकी अच्छा जीवन दे सकती है। दुर्गा पूजा महिशसुरा मरने की खुशी में मनाई जथा है। बंगाल में दुर्गा पूजा बहुत बड़ा त्यौहार है। जोभी घर से दूर रहेते हैं, वह घर वापस आते हैं। माँ अपने बेटे और बेतिया से मिलते हैं, पत्नी अपने पती से मिलते।
राखी
राखी एक त्योहार है जो भाई और बहन मनाते है. रखी की दिन पर परिवार बहुत ख़ुशी से मानथे जाते हैं. इस त्योहार पर भाई और बहन अपने कर्म मानथे हैं. मेरे परिवार में हम राखी मानथे हैं. राखी पर बहन भाई के कलाई पर रस्सी बाँधते हैं. यह रस्सी को राखी खाते हैं. इस का मतलब है की भाई अपनी बहन की रक्षा करता है. राखी श्रवण मई मानाइ जाती है. इस दिन पर पूरा चाँद होता है. पहले रखीयाँ सोना और रेशमी से बनते थे, लकिन अब रस्सी से बनते है. रखीयाँ बहुत सुंदर होते हैं. जब मै चोट्टी थी, मै अपनी भाई के लिये राखी बनाती थी. राखी की दिन पर, मै अपनी भाई की कलाई पर बाँधती थी. फिर मरे भाई मुझको पैसे देता था. हम दोनों एक दुसरे को कुछ मीटा खिलाते थे.
राखी-बंधन
मेरा मन पसंद त्योहार है राखी। यह मेरा पसंदीदा त्योहार इसलिए हैं क्योकि इसमें मेरी बहन भारत में मुझे हर सल् एक हाथ में बंधने के लिए एक राखी भेजती हैं। यह त्योहार हिन्दी कलेंडर में श्रवण महीने का हैं। मेरी बहन भारत में से एक रक्षा-सूत्र भेजती हैं और यह धागा से राक्षस भयभीत रहते हैं। दुसरे लोग जब राखी-बंधन मानते हैं, भाई और बहन मुह में एक दुसरो से मिठैया खिलते हैं। जब बहन (खून से या सिर्फ़ अच्छी दोस्त) राखी देती हैं भाई से, तो भाई उसको तोफा और संरक्षण देते हैं।
भारत की इतिहास में बहुत वक्त ऐसा है जब बहन भाई से संरक्षण मांगती हैं। रानी कर्णावती ने एक राखी हुमायूँ को भेजा था जब वह बहादुर शाह से इराती थी। राखी एकजुटता और सगोत्रता से भी भेजता हैं। भारत के स्वतंत्र के वक्त में बहुत राखी लोगो ने भेजी थी।
-अनुज शाह
भारत की इतिहास में बहुत वक्त ऐसा है जब बहन भाई से संरक्षण मांगती हैं। रानी कर्णावती ने एक राखी हुमायूँ को भेजा था जब वह बहादुर शाह से इराती थी। राखी एकजुटता और सगोत्रता से भी भेजता हैं। भारत के स्वतंत्र के वक्त में बहुत राखी लोगो ने भेजी थी।
-अनुज शाह
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