Monday, 23 March 2009
शादी के रिवाज
हमारे में शादी बहुत धूम - धाम से होती है। कई बार शादिया तीन चार दिन के लिए चलती है। मेरे पापा के तरफ़ एक एसा रिवाज है जिसको मामेरू कहते है। इस रिवाज में दुल्हन के मामा बहुत सारे पैसे और उपहार देते है। जैसी मामा की हैसियत हो उतना वह देता है। कभी कभी रकम एक हजार से लेकर दस लाख भी हो सकती है। एक और रिवाज जो भारत में सारे निभाते है वह सिन्दूर का रिवाज है। सिन्दूर शादी शुदा औरते ही लगाती है अपने पति के लंबे जीवन के लिए। सिन्दूर लाल इस लिए होता है क्योंकि वह प्यार और शक्ति का संकेत है। इस रसम से ही शादी पुरी होती है। ये दोनों रिवाज हमारे में बहुत खास है।
शादी की रिवाज़
दूसरे लोग दूसरे जैसे शादी करते हैं और कोई तरह के पारिवारिक रिवाज होतें हैं। बंगाली शादी में कोई दिलचस्प रसम होते हैं। शादी के समय के पहेले "दोधी मंगल" होता है। यह रसम सुबह दिन निकलने की समय पर दूल्हा और दुल्हन के घर में होता है। दस शादी-शुदा औरत दूल्हा और दुल्हन के साथ एक नस्दीक नदी पर जातें हैं। वहां गंगा की निमंत्रण करते हैं एयर नदी की पानी से दूल्हा और दुल्हन को नहाते हैं। बादमे, दूल्हा और दुल्हन खाना मिलता है। इस समय पर दूल्हा और दुल्हन को बहुत अच्छे से खाना खाना होगा क्योकि फिर खाना शादी के बाद ही खाना खा पाएँगे। खाना में भूना मछली और चावल मिलता है। दही और चुल्हिया खाने के बाद भी आता है। जब यह सब रसम कथं होता हेयर, फिर दूल्हा और दुल्हन नय कपडे पहेंठे हैं। "दोधी मंगल" के बाद शादी के पहेले कोई और भी रसम होते हैं.
शादी की रिवाज़
शादी के एक दिन पहले सब औरत मिल के मेंहदी की रिवाज़ करते है। कोई शादीशुदा औरत दुल्हन के हाथ और पैर पर मेंहदी लगाती है। यह शुभ माना जाता है। इसके साथ बहुत सारे गाने भी गाये जाते है, और कोई बच्चे एक नाटक करते है। आम तौर पर इस रिवाज़ में विधवा औरत नही आती है, लेकिन हमलोग अपने पारिवार में यह बात नही मानते है, और विधवा औरतो भी इस रिवाज़ में शामिल हो सकती है।
हमारे परिवार में शादी होने के बाद पति पत्नी कुछ खेल भी खेलते है। सबसे मज़ेदार खेल अन्घुटी का खेल होता है। जब पति पत्नी एक साथ पहली बार घर आते है, तो हम एक बड़ी बाल्टी, जो दूध से भरा रहता है, तैयार रखते है। हम पति और पत्नी के अन्घुतिया इस बाल्टी में डालते है, और दूध को बहुत मिलाते है। इसके बाद पति और पत्नी एक साथ अपने हाथ बाल्टी में डालते है, और जिसे भी अनघूटी पहले मिलती है, वह इस खेल को जीतता है।
हमारे परिवार में शादी होने के बाद पति पत्नी कुछ खेल भी खेलते है। सबसे मज़ेदार खेल अन्घुटी का खेल होता है। जब पति पत्नी एक साथ पहली बार घर आते है, तो हम एक बड़ी बाल्टी, जो दूध से भरा रहता है, तैयार रखते है। हम पति और पत्नी के अन्घुतिया इस बाल्टी में डालते है, और दूध को बहुत मिलाते है। इसके बाद पति और पत्नी एक साथ अपने हाथ बाल्टी में डालते है, और जिसे भी अनघूटी पहले मिलती है, वह इस खेल को जीतता है।
Sunday, 22 March 2009
शादी का निमंत्रण
मुझे तमिल शादियाँ बहुत पसंद है। में तमिल नाडू से हूँ और मैंने बहुत सारी तमिल शादियाँ देखि है। मेरी सब बहने और भाइयों के शादी सब तमिल शादी ही है। मुहुर्थुम तमिल शादियों mएं बहुत आवश्यक है। यह तीन दिन के शादी में दूसरे दिन में होता है। यह जल्दी सुबह को होता है। मुहुर्थुम सुबह ७ या ८ बजे को शुरू होता है लेकिन साडू ही बता सकता है की यह कब हो सकता है। जब मुहुर्थुम होता है तब असली शादी होती है। नालान्गु भी तमिल शादियों में होता है। यह शादी के बाद होता है। नालान्गु में पति और पत्नी दोनों आपस में खेलतें है। जैसे की एक पानी के कटोरी में कुछ छोटा सा चीज़ होता है और पति और पत्नी दोनों हाथ डालते हैं और वोह चीज़ को ढूँढ़ते है। जो पहले वोह चीज़ हो ढूँढ लेता है वह जीत जाता है। तमिल शादियाँ बहुत लम्बी होती है लेकिन बहुत मज़ा आता है!
शादी के रिवाज
सिन्धी शादी में बहुत रिवाज हैं। शादी से पहले, मेहेंदी के रिवाज होती है। मेहेंदीवाली दुलहन और अपनी सहेलियों के हाथ और पैरों पर मेहेंदी लगाती हैं। इसके बाद, संगीत के रिवाज होती हैं, जिसमे कई तरह के गाने गाई जाती हैं। नवग्रही पूजा से पहले, सागरी के रिवाज होती हैं। दुलहा के रिश्तेदार दुलहन के घर में आते हैं और उसको फूलों के सात सजाते हैं। दुलहा की बहन दुलहन को पाँच तरह के फल और मिठाइयाँ देती हैं, और एक दूसरे को तोहफे देते हैं।
शादी में, मधुपर्क के रिवाज होती हैं। मधुपर्क एक घी और मधु का मिलाव हैं। दुलहन दुलहा को पानी तीन बार देती हैं। पहली बार, दुलहा अपने पैर पर डालता हैं, दूसरी बार अपने शरीर पर, और तीसरी बार, वह पानी पीता हैं। इसके बाद वह थोड़ा मधुपर्क खाता हैं। प्राण कहा जाती हैं और दुलहा और दुलहन आग के साथ फेरे लेते हैं।
एक आम सिन्धी के रिवाज दत्तर हैं। शादी के बाद, दुलहन घर जाती हैं, और दुलहा के परिवार एक परत में, दो 'किलो' नमक लाते हैं। दुलहन के परिवार एक पंखा लाते हैं। दुलहा और दुलहन मौली और छुहारे पूजास्थान में डालते हैं। दुलहा आशार्वाद के लिए, नमक में कुछ पैसे और तोहफे डालते हैं। दुलहन बहुत नमक उठाती हैं और अपने पति के हाथ में डालती हैं। इसके बाद, दुलहन के ससुराल दुलहन के साथ वही करते हैं।
शादी में, मधुपर्क के रिवाज होती हैं। मधुपर्क एक घी और मधु का मिलाव हैं। दुलहन दुलहा को पानी तीन बार देती हैं। पहली बार, दुलहा अपने पैर पर डालता हैं, दूसरी बार अपने शरीर पर, और तीसरी बार, वह पानी पीता हैं। इसके बाद वह थोड़ा मधुपर्क खाता हैं। प्राण कहा जाती हैं और दुलहा और दुलहन आग के साथ फेरे लेते हैं।
एक आम सिन्धी के रिवाज दत्तर हैं। शादी के बाद, दुलहन घर जाती हैं, और दुलहा के परिवार एक परत में, दो 'किलो' नमक लाते हैं। दुलहन के परिवार एक पंखा लाते हैं। दुलहा और दुलहन मौली और छुहारे पूजास्थान में डालते हैं। दुलहा आशार्वाद के लिए, नमक में कुछ पैसे और तोहफे डालते हैं। दुलहन बहुत नमक उठाती हैं और अपने पति के हाथ में डालती हैं। इसके बाद, दुलहन के ससुराल दुलहन के साथ वही करते हैं।
मेरी परिवार के विवाह सम्भंधी रीती रिवाज़ - प्रतिक नरूला
हमारे परिवार में शादी से एक दिन पहेले शाम के समय घर के एक कोने में एक मटका पानी का भर के उस के ऊपर गुलाबी रंग का कपडा रखते है जोकि लड़का यह लड़की के मामा के घर से आता है . और उस के साथ ही मीठे पीले चावल भी रखते है .
फिर घर के सदस्य एक कागज़ पर उस परिवार के जितने भी पुरूष है उनके नाम लिखते है फिर लड़का या लड़की अपने हाथो पर मेंहदी लगाके उस कागज़ पर अपने हाथ छापते है. फिर वह पीले चावल सब रिश्तेदारों को बांटेते है
मुझे यह रिवाज़ बिलकुल भी नहीं समझ आते है लेकिन यह रिवाज़ बहुत सालो से चलता ही आरहा है
फिर घर के सदस्य एक कागज़ पर उस परिवार के जितने भी पुरूष है उनके नाम लिखते है फिर लड़का या लड़की अपने हाथो पर मेंहदी लगाके उस कागज़ पर अपने हाथ छापते है. फिर वह पीले चावल सब रिश्तेदारों को बांटेते है
मुझे यह रिवाज़ बिलकुल भी नहीं समझ आते है लेकिन यह रिवाज़ बहुत सालो से चलता ही आरहा है
शादी का प्रथा
मै गुजराती शादी के प्रथा के बारे मे बताऊंगा। शादी के समय 'हाथएअलो' होता है। इस में दुलहन की साडी दुल्हा का दुपट्टा के साथ बंधवाता जाता है और जोड़ा के दाहिना हाथे दोरी के साथ बंधवाता जाते है। यह सब कुछ अनन्त बन्धन सूचित करता है। उसके बाद जोड़ी भगवन को प्रार्थना करके मांगते की उनको शक्ति और ईमानदारी दे। एक और गुजराती शादी का प्रथा ' वरमाला' है। बुराई प्रभाव को बचाने के लिए जोड़ी के गले बंधवाते जाते है। क्या ये करता मुझे नहीं मालूम। इस के बाद, दुलहन का बाप उनको दुल्हा को देता है. बहुत और गुजराती प्रथाये बाकि है लेकिन मै किसी और को आप को बताने का कम रखूंगा।
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