Tuesday, 21 April 2009
गुजराती शादी
मैं गुजरात से हूँ और हमारे यहाँ शादियाँ के पहले "संजी" होता है. हिंदी में इसे "संगीत" कहते हैं. संजी की रात औरतें और आदमी मिल कर गरबा करते हैं और गाना गातें हैं. घर के बच्चे इस रात नाच गाना तैयार कर के सब के सामने पेश करते हैं और घर के बुजुर्ग भी नाचते और गाते हैं. किसी भी शादी में यह रात मेरा सब से मन पसंद रात होता है. पिछले साल मेरी चचेरी बेहेन की शादी में मैं और मेरे भाई बेहेन ने मिल कर एक नाच पेश किया. दूल्हा और दुल्हन ने हमारा नाच बहुत पसंद किया और बहुत खुश थे. उस रात मेरे पिता जी और उनके भाई बेहेन भी साथ साथ गाये और नाचे. इसलिए मुझे संजी इतना पसंद है क्यूंकि यह मौका था पूरे परिवार को साथ वक़्त गुजारने का. जब मेरे बड़े भाई की शादी होगी मैं संजी में खूब नाचूंगी और सब को भी नाच्वऊंगी.
Monday, 20 April 2009
सिख पंजाबी का शादी आनंद कारज कहेते है. सिख शादी बहुत ख़ुशी होती है. अक्सर सिख शादी प्रेम शादी नहीं होती है. शादी के पहेले रिश्तेदार आते है और मज़ा करते है. लोग गाने गेट है और कहानियों सुनाये देते है. लड़कियों का हाथे पर मेहँदी लगते है. जब शादी का दिन आती है, लोग गुरद्वारा जाते है. वहा शादी होती है. लड़का और लड़की गुरु ग्रन्थ साहिब का आगे बेठ थे है. गुरु ग्रन्थ साहिब से चार बार दोनों घूमना फिरना करते है. साडा दिन के लिए लोग गाने गेट है और नाचते है. खाना भी खाते है सरिमोनी के बाद. शाम में दावत होती है. बहुत लोग वहा जाते है और मज़ा करते है.
Wednesday, 8 April 2009
जन्माष्टमी
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जन्माष्टमी एक हिंदू त्यौहार है जो श्री कृष्ण के जनम दिन की खुशी में मनाया जाता है। उसके अगले दिन लोग उपवास रखते है और फिर रात को बारा बजे तक जग कर भगवन श्री कृष्ण का जनम दिन मानते है। सुबह जल्दी उठकर औरते छोटे बछो के पैर घर के बहार बनती है जिससे यह लगता है की कृष्ण घर में प्रवेश हो रहे है। और बहुत सारी रस्मे है जो लोग जन्माष्टमी पर मानते है। रात भर भजन होता है। आधी रात को छोटे कृष की मूर्ति को नलय जाता है, झूला मैं डाला जाता है, और फिरसे पूजा करतें है। आदमी लोग एक के ऊपर एक खड़े होतें है और एक लटकता हुआ मटका फोड़ते हैं। लोग खाते नहीं है और पूरा दिन पानी भी नहीं पीतें है। लोग बहुत खुश होतें है क्यूंकि कृष्ण भगवान् विष्णु का अवतार है।
शादी के रस्मे
दक्षिण भारत की शादिया उत्तर भारत से बहुत अलग हैं। पंजाबी, गुजरती, और सिन्धी शादियाँ अवश्य बडे धूम धाम से की जाती हैं लेकिन दक्षिण भारत में संगीत, मेंहदी जैसे रस्मे नही होती। में आँध्रप्रदेश से हूँ और यहाँ की शादियाँ बहुत ही अलग हैं। में दो रस्मों के बारे में बात करूंगी। पहले रस्म को 'काशी यात्रा' कहा जाता हैं। यह रस्म शादी के पहले होती हैं। दूल्हा पूजा करता हैं और फिर कहता हैं की शादी करने के बजाय वह काशी जाना चाहता हैं और अपना जीवन भगवान् सो समर्पित करना चाहता हैं। हाथ में चाता लेकर और लकड़ी के चप्पल पहेनकर वह निकलता हैं। दुल्हन के पिता और भाई दुल्हे को रोकने और मनाने की कोशिश करते हैं। दूसरा रस्म को 'स्नाताकुम' या 'धागे की रस्म' कहा जाता हैं। इस रस्म में दुल्हे के घर में पूजा होती हैं जहाँ दुल्हे को ब्रह्मण का धागा पहनाया जाता हैं।
गणेश चतुर्थी
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गणेश चतुर्थी भाद्रपद महीने में आता हैं। यह त्यौहर इसलिए मनाया जाता हैं क्यूंकि भगवान् गणेश अपने भक्तो केलिए धरती पर आते हैं। यह त्यौहार महराष्ट्र, गोआ, गुजरात और आंध्र प्रदेश में मनाया जाता हैं। पहले दिन, लोग
भगवान् गणेश की मूर्ती खरीदते हैं और घर लेजाकर पूजा करते हैं। मुंबई और दूसरे बड़े शहरों में, गणेश जी के बड़े-बड़े मूर्तियाँ भी बनाये जाते हैं और मंदिरों में पूजा की जाती हैं। अगले दस दिनों केलिए, लोग मेहमानों को अपने अपने घर बुलाते हैं और दावत देते हैं। कहते हैं की जितने गणेश की मूर्तियाँ तुम देखो, उतना ही शुभ हैं। दस के बाद, फिर से एक चोटी सी पूजे की जाती हैं और गणेश की मूर्ती का विसर्जन की जाती हैं। यह दिन बड़े धूम धमके से मनाया जाता हैं। बड़े मूर्तियों को ट्रकों पर रख कर, बैंड बाजे के साथ, रोड पर चलते हैं। लोग खूब जोश में नाचते हैं। उस दिन सब लोग जाकर रोड पर खड़े हो जाते हैं, और मनोरंजित दृश्य देखते हैं।
Tuesday, 7 April 2009
लोहरी
पुनजब मे लोग लोहरी मनाई जाते है। सुभे मे बच्चे पेसे लेते है घर घर से। रत मे लोग आग के नजदीक मिलते है। यहाँ लोग कुछ खाते है और गाने गाते है। घर से लोग खाना लेट है। वहा लोग दूल्हा भट्टी का खानी सुनैजाते है। दूल्हा भट्टी अमेरिका का रोबिन हुड जेसे है। कीमती लोग से चुराके गरीब लोग गो देता था। जब लोहरी आता है, तब विंटर ख़त्म हो रही है। लोग भंगरा करते है और ढोल बजाते है। लोग तिन दिन के लिए लोहरी मनाई जाते है। घर मे या आग के पास पंजाबी लोग गचते है। पंजाबी लोग को नाचना पसंद लगता है। दुसरे घर जाके लोग गाने गाते है। सारा दिन के लिए ये करते है। बहुत खुशी त्यौहार है और लोग बोथ खुश होते है।
करवा चौथ
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करवा चौथ एक हिन्दु त्योहार है जो शादी-शुदा औरतें मनाते हैं। इस दिन पर औरतें ब्रत रक थे हैं अपने पती के लम्बी जिन्दगी के लिये। पतनी का कषट उसकी प्यार का चिन्ह है। यह त्योहार कर्तिक महीने मे मनया जाता है, पुर्णिमा के चार दिन बाद और दीवाली के आट दिन पहले। करवा चौथ के रात पर विवाहित औरतें सुन्दर क्प्डे और गहने पहन्ते हैं और हाथों पर मेंहदी लगा ते हैं। जब चान्द निकलता है, तब वे उसकी पूजा कर थे हैं और भगवान को करवा चराते हैं। उसके बाद वे चलनी से अपने पती को देख थे हैं और ब्रत तोड ते हैं। औरत पहला काट अपने पती के हाथ् से खाते हैं और तब अनोख भोजन खाते हैं।
इस त्योहार के साथ बहुत कहनीओं जुडे वे हैं। अब यह त्योहार विवाहित औरत का शक्ती से मिला हुआ है लेकिन इसकी शुरूआत कुछ और है। पहले जमाने में लड्कीआं और छोटे उमर मे शादी करते थे और अपने पती के घर एक नया जगा थे। वहां वह किस्सी को भि नहीं जान्ती थी, थो वह एक सहेली बनाती थी। दोनो लड्की उमर मे साथ थे और बहन जैसे बन जते थे। करवा चौथ पर उनकी दोस्ती मनया जत था। इस दिन पर वे अपने दोस्त के यहां तोफा लेके जते थे। पती का लेना देना इस त्योहार से बाद मं आया ता।
Monday, 6 April 2009
राखी
राखी एक बहुत मशहूर त्युहार है। राखी श्रवण के मेहेना में मनाया जाता है। राखी भाइयो और बहेनो के लिए एक बहुत ख़ास त्युहार है। लड़किया अपने भाई के हाथ पर एक राखी बंधती है। यह राखी का मतलब होता है की बेहें की प्यार हमेशा उसके भाई के साथ रहेगा, और वह उसकी सुर्काक्षा करेगी। दिन में बहेनो अपने भाइयो के लिया पूजा करती है। इसके बाद भाई अपने बेहेन की मुँह मीठा करता है और उसे कुछ पैसे देता है। राखी के समय बाज़ार में बहुत सारे सुंदर रखिया बिखते है।
रक्शा बन्धन
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रक्शा बन्धन एक आवश्यक त्यौहार उत्तर प्रदेश मे होता है । इस त्यौहार मे बहिन अपने भाई को राखी बान्ती है । लेकिन बहुत और भी होता है इस त्यौहा मे । परीवार मे सब लोग आते है और पूजा कर्ते है । पूजा के बाद सब लोग सात सात खान खाते है । पूजा मे भी कुच मिठैईये होते है । जब बहिन रखी बान्ती है, भाई उनको पैसा देता है और आशिरवाद लेता है । तब इन दोनो मितठैये खिलाते है और टीका ल्गाते है । अन्त मे बहिन भाई को आरती कर्ती है । यह त्यौहार का अभिप्राय है की भाई अपना बहिन को शरण देता है ।
ओणम
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ओणम केरला का सबसे बड़ा त्यौहार है। महाबली नाम से एक असुर रजा था केरला में और इसी के आदर में लोग ओणम मनातें है। यह उपज के कारण भी मनातें है। ओणम मलयाली कैलेंडर में चिंगम में आता है। ओणम दस दिन के लिए मनाया जाता है। साँप का नाव के खेल होतें है, कथकली नाच और गाना भी होता है। महाबली एक बड़ा राजा था लेकिन भगवान् सब उसे राजा बनने से रोक रहे थे और भगवन विष्णु एक छोटा आदमी बनकर महाबली को नरग ले जाना चाहता था। विष्णु ने उसे एक बिनती दी, की वह हर साल एक बार अपने राज्य, केरला, जा सकता था और उसके लोग को मिलने जा सकता था। तोह ओणम उसका लोटान है। पूकलम, फूल का गलीचा हर घर के आगे होता है, सब जन को नए कपड़े मिलते है, और बहुत सारा गरमा गरम काना मिलता है। एक मिठाई पयीसम नाम का सबको मिलता है। हत्थी, आतिशबाजी और बहुत सारा खेल होता है। ओणम हिंदू, मुस्लिम, यह च्रिस्तियन लोग सब मना सकते है।
Sunday, 5 April 2009
नवरात्री
गुजरात में नवरात्री सबसे रंगीन त्यौहार है। अक्तूबर में यह त्यौहार नौ रत मनाया जाता है। पिछले दिन दसरा कहा जाता है। एक दिन पहले लोग गॉव का कटरे और मन्दिर में आते हैं। वे गाते और नाचते है तक सुबह पूर्व। त्यौहार के समय देवी माँ का पूजा किया जाता है। जब कारीगर उनके बाजे का पूजा करते है, कृषक उनके हल, योदा उनके आयुध, और छात्र उनके किताबें तब त्यौहार समत्प करता है। नवरात्री त्यौहार पक्षात के नजदीक है। यह दिन शरद परनीमा कहा जाता है। चंद उजाला के निचे लोग चावल खाते और दूध पीते हैं। गुजरात में देवी माँ के बारे में सबसे प्रचलित मंदिर अम्बा माता और बेचार्जी माता हैं। नवरात्री दिनों में लोग ये मंदिर घुमने जाते हैं और गुजराती लोक नाटक आनंद लेते हैं।
रक्षा बंधन
रक्षा बंधन के बारे में, एक कहानी है। बहुत हज़ार साल पहले, देवते और भूत बैर में जगड़ाते थे। देवते के रजा, इन्द्रा, बैर के बारे में बहुत परेशानी लगता था। उसकी पत्नी, इन्द्राणी, बहुत चिंतू हुई, तो उसने एक जादू बनाकर इन्द्रा की दाये कलाई पर बांधा। जादू ने इन्द्रा भूत से बचाया।
रक्षा बंधन अगस्त में मनाई जाती है। राखी का दिन में, सब भाई और बहने सुबह को उठते हैं। वे नये कपड़े पहनते हैं। भाई अक्सर कुर्ता पहनते हैं और बेहेने सलवार-कुर्ता या साड़ियाँ पहनती हैं। बहने राखी के लिए एक थाली को सजाती हैं। उसपर, रोली (तिलक के लिए), अक्षत, दिया या दीपक (भाई की आरती के लिए), मिठाईयाँ और राखी। पहले, बहने अपने भाईयो के माथे पर तिलक लगाती हैं। इस के बाद, तिलक पर कुछ अक्षत लगाती हैं। फिर वे आरती करके अपने भाईयो की कलाईयाँ पर राखी बांधती हैं। ये राखियाँ बहुत सुंदर और रंगीला हैं। मेरे बहने नही है लेकिन मेरे कुछ भाई-बहन और दोस्त मुझे राखियाँ देती हैं।
राखी बांधने के बाद, बहने अपने भाईयो को मिठाईयाँ देती हैं। फिर, भाई अपनी बहने को कुछ तोहफे देते हैं। अक्सर तोहफे पैसे हैं। भाई और बहनों दोनों को लंबा जीवन, सफलता, प्रताप और तबीयत के लिए इच्छा करते हैं। सब भाई और बहने अपने रिश्तेदारो के घर जाती हैं और नमस्कार अदला बदला करते हैं।
Ugadi
उगादी आंध्र प्रदेश में यह दिन नया वर्ष मनाया जाता है। यह हिंदू कैलेंडर में चैत्र मॉस में होता है। यह अंग्रेज़ी कैलेंडर में मार्च और अप्रैल होता है। इस्सी समय पर स्प्रिंग शुरू होता है- बोहुत जस्मीन फूल आते हैं। लोग मानते हैं की स्प्रिंग वर्ष का सबसा पहला सीज़न हैं क्योंकि नया फूल, औजार, औउर धरती पर नया जीवन आता है। नया जीवन और नया वर्ष एक साथ शुरू होते हैं। लोग सोचते हैं की इस दिन पर, भगवान् भरमा ने 'क्रेअशन' शुरू किया। इस दिन पर यह युग, कलि युग, शुरू हुआ। लोग यह भी मनाते हैं किड इस दिन पर कृष्ण ने अपना शरीर प्रबहत्सा में कुर्बानी किया।
उगादी से एक हफ्ता पहले लोग अपने घर को साफ़ करते हैं, और नया-नया कपड़े खरीदते है। उगादी दिन पर, धुप आने से पहले, लोग नहाते हैं, और अपने घर के दरवाज़े पर आम का पता रखते हैं। उगादी पच्चादी बनाया जाता है- जिस के मतलब है की जीवन में अच्छा औउर बरह दोनों है। लोग कविता भी एक दूसरे को बोलते हैं।
उगादी से एक हफ्ता पहले लोग अपने घर को साफ़ करते हैं, और नया-नया कपड़े खरीदते है। उगादी दिन पर, धुप आने से पहले, लोग नहाते हैं, और अपने घर के दरवाज़े पर आम का पता रखते हैं। उगादी पच्चादी बनाया जाता है- जिस के मतलब है की जीवन में अच्छा औउर बरह दोनों है। लोग कविता भी एक दूसरे को बोलते हैं।
लोहरी
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पुनजब में लोग लोहरी बनाते हैं। हर साल, लोहरी जनवरी में होती है जब पुनजब के खेतों में काफी गेहूं भरा होता है। लोहरी अक्सर बाहर मनाई जाती है। बाहर लोग एक साथ मिलकर अलाव के पास शाम को बैठाते हैं। लोहरी के दिन बच्चे गाना गाते हुए एक घर से दुसरे घर जाते हैं। बच्चे दूल्हा भट्टी के गाने गाते हैं। दूल्हा भट्टी एक चोर था जो गरीब लोगो की मदद करता था और उनकी अधिकारों के लिए लुरता था। यह गाना गाने वाले बचों को लोगों से मिठाई मिलती है और कभी कभी उनको पैसे भी मिलते हैं। जो सब कुछ बच्चों को मिलता है, उसको लोहरी कहते हैं और यह सब कुछ लोहरी के रात बांटा जाता है।
रात को मूँगफली और फुलिया आग में फेंक जाते हैं अग्नि के लिया, जो एक आग का भगवन है। लोहरी में लोग अग्नि को पूजा करते हैं अलाव के पास और परसाद बनते हैं। परसाद पाँच चीजों से बना होता है -- मूँगफली, फुलिया, गचुक, तिल, और गुर। पंजाबी लोग अपने घरों मे लोहरी बनाते हैं। घर पर लोग काफी रंगीन कपड़े पहनाते हैं और नाचते हैं । लोग काफी भंगरा और गीधा करते हैं।
नवरात्रि
नवरात्रि एक हिंदू त्यौहार है। नवरात्रि संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है नौ रातें। यह त्यौहार साल में दो बार आता है। एक शरद नवरात्रि, दूसरा है बसन्त नवरात्रि। नवरात्रि के नौ रातो में तीन हिंदु देवियों पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ में स्वरुपों पुजा होती है जिन्हे नवदुर्गा कहते हैं। नवरात्रि वर्ष में दो बार आते हैं - चत्र मास में और क्वार या आश्विन मास में।
नवरात्रि पुरे भारतीय में मनाई जथा है। सब लोग शक्ति की पूजा करते हैं। जो भी अप्पको चन्हिया वह भगवान् शक्ति दे सकती हैं । वे सबकी अच्छा जीवन दे सकती है। दुर्गा पूजा महिशसुरा मरने की खुशी में मनाई जथा है। बंगाल में दुर्गा पूजा बहुत बड़ा त्यौहार है। जोभी घर से दूर रहेते हैं, वह घर वापस आते हैं। माँ अपने बेटे और बेतिया से मिलते हैं, पत्नी अपने पती से मिलते।
राखी
राखी एक त्योहार है जो भाई और बहन मनाते है. रखी की दिन पर परिवार बहुत ख़ुशी से मानथे जाते हैं. इस त्योहार पर भाई और बहन अपने कर्म मानथे हैं. मेरे परिवार में हम राखी मानथे हैं. राखी पर बहन भाई के कलाई पर रस्सी बाँधते हैं. यह रस्सी को राखी खाते हैं. इस का मतलब है की भाई अपनी बहन की रक्षा करता है. राखी श्रवण मई मानाइ जाती है. इस दिन पर पूरा चाँद होता है. पहले रखीयाँ सोना और रेशमी से बनते थे, लकिन अब रस्सी से बनते है. रखीयाँ बहुत सुंदर होते हैं. जब मै चोट्टी थी, मै अपनी भाई के लिये राखी बनाती थी. राखी की दिन पर, मै अपनी भाई की कलाई पर बाँधती थी. फिर मरे भाई मुझको पैसे देता था. हम दोनों एक दुसरे को कुछ मीटा खिलाते थे.
राखी-बंधन
मेरा मन पसंद त्योहार है राखी। यह मेरा पसंदीदा त्योहार इसलिए हैं क्योकि इसमें मेरी बहन भारत में मुझे हर सल् एक हाथ में बंधने के लिए एक राखी भेजती हैं। यह त्योहार हिन्दी कलेंडर में श्रवण महीने का हैं। मेरी बहन भारत में से एक रक्षा-सूत्र भेजती हैं और यह धागा से राक्षस भयभीत रहते हैं। दुसरे लोग जब राखी-बंधन मानते हैं, भाई और बहन मुह में एक दुसरो से मिठैया खिलते हैं। जब बहन (खून से या सिर्फ़ अच्छी दोस्त) राखी देती हैं भाई से, तो भाई उसको तोफा और संरक्षण देते हैं।
भारत की इतिहास में बहुत वक्त ऐसा है जब बहन भाई से संरक्षण मांगती हैं। रानी कर्णावती ने एक राखी हुमायूँ को भेजा था जब वह बहादुर शाह से इराती थी। राखी एकजुटता और सगोत्रता से भी भेजता हैं। भारत के स्वतंत्र के वक्त में बहुत राखी लोगो ने भेजी थी।
-अनुज शाह
भारत की इतिहास में बहुत वक्त ऐसा है जब बहन भाई से संरक्षण मांगती हैं। रानी कर्णावती ने एक राखी हुमायूँ को भेजा था जब वह बहादुर शाह से इराती थी। राखी एकजुटता और सगोत्रता से भी भेजता हैं। भारत के स्वतंत्र के वक्त में बहुत राखी लोगो ने भेजी थी।
-अनुज शाह
Raksha Bandhan
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रक्षा बंधन हर साल भारत में मनाया जाता हैं. पूर्णिमा के वक्त पर, हर बहें अपने भाई के हाथ पर एक राखी बांधती हैं. हर भाई का ज़िमादारी हैं के उनके बहें को संभालना हैं और यह राखी इसका प्रतिक हैं. इस त्यौहार का भी एक कहानी हैं. बलि प्रलाध का पोता था और एक महान राक्षश रजा था. वह भगवन विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था. लेकिन इन्द्र (वर्षा का भगवन) और बलि के बीच में जब युद्ध हुआ, विष्णु को इन्द्र को बचाना पड़ा और बलि को पाताल में चोदना पड़ा. बलि को पता था के उनके विष्णुजी उन्हीके बाला के लिए पाताल में डाला पड़ा. विष्णुजी उनके उपासना से खुश हो कर, उनके राजत्व का पहरा बनगया. लक्ष्मी माँ को बहुत दुखी हुई उनके पति को ऐसे देख कर. उन्होने एक ब्राह्मण औरत बन कर, बलि के राजत्व में आकर बलि से पुछा अगर वह उनके राजत्व में रहे सकती हैं. बलि ने उनको अपने बहें जैसे समजकर लक्ष्मीजी को राजत्व में रहेने दिया. लक्ष्मीजी के आने के बाद, राजत्व सफल बनगया. एक दिन, पुर्णिमा के वक्त प्र, लक्ष्मीजी ने बलि के हाथ प्र एक राखी बांध कर, उनके सौभाग्य के लिए पूजा किया. बलि को इतना कुशी हुआ के उसने लक्ष्मीजी को एक वादा दिया. लक्ष्मीजी के कौनसे भी इचा, रजा बलि पूरा करेगा. लक्ष्मीजी ने उसे अपने पताजी (भगवन विष्णु) वापस माँगा. बलि को यह बात समज नहीं आ रहा था. फिर, लक्ष्मीजी और भगवन विष्णु ने अपने असली रूप में बदल्गाये. फिर, रजा बलि को समाज आया के उनके उपासना की वजय से लक्ष्मीजी और भगवन विष्णु अपने आपसे दूर हुए. इसी तरह, रक्षा बंधन शुरू हुआ. हर सल्, बुहेनें अपने भाइयों के हाथ पर राखी बांधते हैं और भाइयों वादा लेते हैं की वे उन्हें रक्षा करेंगे और उन्हें करची देते हैं.
कृष्ण जन्माष्टमी
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कृष्ण जन्माष्टमी भारत का एक प्रसिद्द त्यौहार है. जन्माष्टमी अगस्त या सितम्बर के प्रारंभ में पड़ता है. इस साल अगस्त १४ आयेगा. सब लोग जन्माष्टमी की प्रतीक्षा करते है क्योकि उस दिन पर भागवान कृष्ण धरती पर प्रकट हुए. वे अँधेरी और आंधी रात प्रकट हुए,कुकर्मी लोग को मरने के लिए और धाम को बहाल करना. जन्माष्टमी की दिन पर लोग उत्साह से मानते है. भक्त लोग भजन गाते है और संगीत वधे बजाते है. कृष्ण के दर्शन मूर्ति रूप मै करते है. सामान्यत लोग कृष्ण लीला का नाटक मै हिस्सा लेते है. दिन में अभिसेका भी होता है, जहा कृष्ण को दूध से धोते है. लोग खूब खाना बनाते है, १०८ प्रकार के, लेकिन दिन में नहीं खाते है क्योकि खाने उन सब के लिए नहीं है. आधी रात कृष्ण की प्रकट समय है तो सब लोग उनको खाना प्रधान करते है. इस समय लोग नाचकर बजन गेट है. फिर प्रशाद का खाते बता जाता है और लोग घर जाकर सो जाते.
नवरात्रि
बचपन से मैंने बहुत सरे हिन्दुस्तानी त्यौहार मनाया लेकिन मुझे नवरात्रि का त्यौहार अधिक मनपसंद है। यह त्यौहार ज्यादा गुजुरती और बंगाली लोग मनाते हैं। इसका अर्थ नौ रातें, इसी लिए नौ रातें और दस दिन तक मनाया जाते हैं। यह त्यौहार लगभग सेप्टेम्बर या अक्टोबर महीनों में आता है। यह त्यौहार देवी दुर्गा जो गुर्गा माता है उसके नाम पर समर्पित किया है। दुर्गा को भारतीय लोग शक्ति की देवी कहते हैं। ये नौ दिन में पहले तिन दिन देवी दुर्गा , उसके बाद तिन दिन देवी लक्ष्मी , और अन्तिम के तिन दिन देवी सरस्वती को समर्पित करना जाता है। समाज के सब लोग रातों में मिलके डंडिया रास और गरबा का नृत्य करते हैं। और बहुत अच्छा खाना बना के साथ में भोजन करते हें। सबसे लोग रंगीन और सुंदर कपडे पहनता हैं। बहुत सरे पूजा होती है। पुराने दिनों में यह प्रथा थी कि किसानें देवी को पूजा करके ज्यादा उपज होने का आशीवार्द मांगते थे। कोई पुरे सब नौ दिन उपवास करते हैं। दसवाँदिन को वीजय दशमी दिन कहता है और गुजुरत में जलेबी गांन्तियाँ खाकर यह दिन मानते है। जब में दस साल की थी टीबी मेरी मौसी ने मेरे लिए हिन्दुस्तानी से ख़ास रिगीं चोली भेजी थी और मैनें यह नवरात्री में फंकी पुरी रत डंडिया रास किए थे। और बहुत मज़ा आया।
वैसाखी
केशगढ़ आनंदपुर साहिब के पास से 1699 के वैसाखी त्योहार, पर, गुरु गोबिंद सिंह, दसवीं गुरु सिखों के अकाल खालसा की स्थापना की. गुरु गोबिंद, सब के अनुयायियों के लिए भारत पर वैसाखी आनंदपुर में उसे मिला था. गुरु गोबिंद सिंह ने एक तलवार से एक तम्बू से उभरा है और लोगों से अपने विश्वास के लिए अपनी जान देने के लिए कहा है. एक युवा सिख, स्वेच्छा से एक तम्बू में गुरु का पालन किया. कुछ ही समय के बाद, गुरु अकेले अपनी तलवार खून से लथपथ साथ, आये और एक दूसरे स्वयंसेवक के लिए पूछा. एक दूसरे सिख आगे और फिर गुरु के तम्बू में, उसे ले गया और फिर कदम अकेले, अपनी तलवार और खून से लथपथ दिखाई दिया. यह एक तीसरा, चौथा और पांचवा स्वयंसेवक के लिए दोहराया गया था. के रूप में बहुत से कहा कि गुरू के पाँच सिखों को मार डाला था विश्वास भीड़ बहुत, कमज़ोर बने. वह जल्द ही तम्बू के फिर से, इस बार सभी पाँच सिखों कौन है और अच्छी तरह से जीवित थे और पगड़ी और है कि अन्य प्रतीकों में तैयार के बाद बाहर आया बाद से सिख पहचान का प्रतीक हो. उन्होंने कहा कि पंज प्यारी ने पाँच सिखों बुलाया है - प्रेमिका पाँच। एक चाल में अपने कुलनाम छोड़ा - पाँच और सिंह ने आम नाम लिया, साहस की जरूरत के एक अनुस्मारक "शेर" अर्थ. एक ही समय में, गुरु ने सिख औरते कौर कुलनाम दे दिया. गुरुजी तो बैठ गये पाँच से पहले और उसके आरंभ करने के लिए उन से पूछा. अकाल की सेवा करने के लिए एक के जीवन का कुल आत्मसमर्पण का यह अधिनियम, के कालातीत एक, और गुरु गोबिंद सिंह के चरणों में सिख धर्म बनाया. उसके बाद कई शताब्दियों के लिए पंजाब में हिंदू के सभी परिवारों की, पहली नर बच्चे को एक सिख के रूप में नियत करता था.
Saturday, 4 April 2009
वसाखी
वसाखी एक सिक्ख त्यौहार है। लोग एप्रिल १३ या १४ में मनाये जाते है। सिक्ख लोग सरे दुनिया में मनाये जाते है। लोग खालसा के शुरुआत के लिए मनाते है। खालसा १६९९ में शुरू हुआ। सिक्ख लोग फसल के लिए भी मनाये जाते है। इस समय में सिक्ख अपने गुरु के शिक्ष्ण के बारे में सोचते है। लोग बहुत खुशी, रंगीन और दिल से मनाये जाते है।
वसाखी की कहानी यह है: गुरु गोबिंद सिंह जी फसल की त्यौहार पर खेसा से बाहर आया। वह सिक्ख लोगो को पुछा की " अगर आप अपनी जान देने का तयार है, उंदर आइये। पंज सिक्ख आदमी तयार थे। एक एक कर गुरु जी बाहर आयें और उसकी तुल्वार खून पर रिस रहा था। लोग बहुत पुरेशन हुए। पंज आदमी बाहर आयें। गुरु जी ने आदमी को खालसा में बपतिस्मा दिया। लोग नाचते, गाते, और परेड करते है। नगर कीर्तन भी होते है। लोग नगर में गुरु ग्रन्थ साहिब से गाने और भजन गाते है।
लन्दन में वसाखी का त्यौहार त्रफालगर स्क्वेर में मनाया जाता है। एक बडा मेला भी होता है।
वसाखी की कहानी यह है: गुरु गोबिंद सिंह जी फसल की त्यौहार पर खेसा से बाहर आया। वह सिक्ख लोगो को पुछा की " अगर आप अपनी जान देने का तयार है, उंदर आइये। पंज सिक्ख आदमी तयार थे। एक एक कर गुरु जी बाहर आयें और उसकी तुल्वार खून पर रिस रहा था। लोग बहुत पुरेशन हुए। पंज आदमी बाहर आयें। गुरु जी ने आदमी को खालसा में बपतिस्मा दिया। लोग नाचते, गाते, और परेड करते है। नगर कीर्तन भी होते है। लोग नगर में गुरु ग्रन्थ साहिब से गाने और भजन गाते है।
लन्दन में वसाखी का त्यौहार त्रफालगर स्क्वेर में मनाया जाता है। एक बडा मेला भी होता है।
Friday, 3 April 2009
संक्रान्ति
आंधरा प्रदेश में, संक्रान्ति एक बड़ा त्यौहारहै। यह त्यौहार अनाज काटने के समय में आता है। इसलिए यह त्यौहार किसानों के लिए, बहुत खांस है। इस मेले के बारे में, एक कहानी है। इस कहानी है कि इस समय पर, आसमान में, सूरज यात्रा शुरू करता है। संक्रान्ति पर सूरज, उसका स्वगीर्य रस्ते पर, मकर राशि में जाता है। "ग्रेगोरियन कलेंडर" में, संक्रान्ति जनवरी महीनें में आता है।
आंधरा में, लोग संक्रान्ति चार दिन के लिए मानते हैं। पहले दिन का नाम "भोगी" है। इस दिन में, लोग शाम को बड़े अलाव बनते हैं, और नाचते हैं, और जानते हैं। दूसरी दिन का नाम संक्रान्ति है। यह दिन सारा संक्रान्ति त्यौहार में, मुख्य दिन हैइस दिन में, सब लोग नए कपड़े पहनते हैं, और भगवान को पूजा करते हैं। भगवान, परिवार, और दोस्तों को मिटाइयां देते हैं। चौथा दिन का नाम "मुकानुमा"' है। यह दिन मांसाहारी लोग बहुत माँसाहारी खाना खाते हैं। पहले तिन दिनों के लिए, यह लोग माँसाहारी खाना नही खाते। संक्रान्ति में, एक बुरा चीज़ है कि बहुत अवैध पणन है।
आन्ध्र में, संक्रान्ति के दौरान भी, "हरिदास" लोग गर-गर जाकर, चावल के लिए पहुंचते हैं। संक्रान्ति के दौरान रंगोली प्रतियोगिते बहुत प्रचलित है। भारतीय लोग संक्रान्ति त्यौहार सारे भारत देश मानते हैं, लेकिन उस के लिए अलग नाम हैं। तमिल नाडू में, "पोंगल" है और पंजाब में, "लोड़ी" है।
Wednesday, 1 April 2009
पोंगल
पोंगल दक्षण भारत में बहुत महेत्वा है। पोंगल के पहले थीं साल महीने लोग बीज ज़मीं में डालते है और जन्वेरी में जब यह बीज उगते है तब बहुत खुशी मनाते है। पोंगल सबसे बड़ा त्योहार है और चार दिन चलता है। यह त्योहार थान्क्स्गिविंग के जैसे होता है। पोंगल चौदह या पंधरा जन्वेरी कर आता है। इस दिन बहुत पूजा होती है और लोग अच्छे कपड़े पहेंते है और बहुत अच्छा खाना बन्ता है। पहला दिन भगवन इन्द्र की पूजा होती है। इन्द्र बारिश का भगवन है और अच्छे पौदों के लिए बारिश जरूरी है। इस दिन बहुत नाच गाना होती है। दुसरे दिन चावल को उबला जाता है और सूर्य भगवन के पूजा होती है। सब लोग नया कपड़े पहेन्ते है। घर के उंदर और बहार रंगोली डालते है। तीसरे दिन सब लोग को पोंगल किलय जाता है और गई को पूजा करके उनको भी खाना दिया जाता है। गई के आरती भी करते है। चौथा दिन मिटा पोंगल बनाया जाता है और भाइयों के लिए पूजा करते है और आरती करते। पोंगल के समय बहुत खुशी होती है।
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