Saturday, 7 February 2009

भंगडा


भंगड़ा एक भारतीय लोक नाच है । पंजाब में शरू हुई थी । शरू में, लोग भंगड़ा उछल आने के लिए करते थे । यह एक मुजेदार और तेज़ नाच है । आज-कल भंगड़ा सिर्फ़ एक भारतीय लोक नाच नही है - लोग अमेरिका, कनेडा, और युरप में करते है ।
भंगड़ा के साथ तरीके है - झूमर, लूद्दी, गिद्धा , जुल्ली, दान्कारा, धमाल, सामी, किकली, गतका । हर तरीका असमान है। यह है संस्कृति तरीके । आज-कल लोग हिप-होप, रेग्गे, और टेक्नो नाच भंगड़ा के साथ करते है। गाने बहुत दिलचस्प है क्यूंकि आज-कल गाने एक बड़ी मिलाव है। झूमर, लूद्दी, और धमाल में नर्तक बृत में नाचते है । दान्कारा में, नर्तक लड़की के साथ नाचते है । अक्सर लडकियाँ गिधा लेकिन नशे में आदमियो भी करते है। किकली एक लडकियाँ का नाच है और उस नाच में लोग बोलियाँ गाते है । गतका एक सीखी मार्शल आर्ट है ।
भंगडा में नर्तक बहुत सुंदर कपडे पहते है । आदमी कुर्ता और चादर पहते है और औरते सलवार पहती है ।

Friday, 6 February 2009

मेरा मनपसंद भारतीय लोक नाच



मुझे नाच बहुत अच्छा पसंद है। मेरा मनपसंद नाच, "फयूसन" है। यह डांस दोनों अंग्रेज़ी और भारतीय का नाच है। लेकिन, मेरा मनपसंद भारतीय लोक नाच "रास गरबा" है। हिन्दुस्तानी की संस्कृति में, कृष्ण ने यही नाच राधा के साथ खेले। यह नाच का नाम "रास लीला" था। अब, रास गरबा गुजुरात में बहुत मशहूर है।
एक बार, मेरे हीय स्कूल में, मैं और अपने दोस्त एक गरबा डांस नाचे। हम अपना स्कूक का "कल्तुरल शो" के लिए नाचे। यह डांस के लिए, हम सब ने बहुत प्रैकटिस किया। गरबा नाच में, लड़के और लडकियां दोनों नाचते हैं। लड़कियों के कपड़े का नाम "घगरा चोली" है। यह डांस में, "दान्डीया" के साथ नाचते है। हमारे कल्तुरल शो के लिए, हमारा डांस का गाना का नाम "डोल बाजे" था। रास गरबा में, दोनों कपड़े और संगीत बहुत मजेदार और सुंदर हैं।

Wednesday, 4 February 2009

मेरा मनपसंद शास्त्रीय नाच (पार्ट २)

कुचिपुडी में एक अलग तरह का नृत्य भी होता है जो और कोई नृत्य में नही होता। कुचिपुडी के तरंगम में हमे एक पीतल के थाली के ऊपर नृत्य करना होता है। हाथ में दिया यह फिर माथे पे पीतल का लोटा भी होता है। इस नृत्य में भरत नाट्यम के जैसे ही कपड़े और जेवर पहने जाते है। सात आठ साल के बाद लोग रंगप्रवेसम करते है जो कुचिपुडी का क्रमागति होता है। इसमे नर्तकी को तीन घंटे कुचिपुडी के अलग नृत्य करने होता है उसके सारे परिवार और दोस्तों के सामने। मेरे रंगप्रवेसम में करीब ५०० लोग आए थे और ४०,००० का कर्च हुआ था। कुचिपुडी से मुझे काफी सिखने को मिला है अपने धर्म और संस्कृति के बारे में। क्योंकि कुचिपुडी मेरे दिल के बहुत करीब है वह हमेशा मेरा मनपसंद नृत्य होगा।

मेरा मनपसंद शास्त्रीय नाच

मैं आज एक अलग तरह के नृत्य के बारे में बात करुँगी जिसका नाम है कुचिपुडी। कुचिपुडी आंध्र प्रदेश में शुरू हुआ था कई सालो पहले। श्रीमान सिद्धेन्द्र योगी ने यह नृत्य को उसका रूप दिया। मैं जब छे साल की थी तब मैंने कुचिपुडी सीखना शुरू किया था और मैं तब से लेकर आज तक सीखती ई हु। कुचिपुडी भरत नाट्यम से बहुत मिलता जुलता है। कुचिपुडी मैं चेहरे के ज़्यादा हाव भाव होते है।

निशा और माधव

http://umichlang10.hipcast.com/download/51caab90-a3be-d773-4ff4-62add7d6431b.mov

Tuesday, 3 February 2009

दहेज प्रथा

दहेज प्रथा एकआछी चीझज थी, लेकिन अब बहुत गड़बड़ हो गया । आज कल सब लोग पैसा कमा सकते है । औरत भी कमासकते है । जब औरत काम कर सकते, तब दहेज प्रथा की क्या जरूरत क्या है? दहेज प्रथा अब कुच नही करता है । आब बस खराब लोग पैसा लेते है बिना मतलब से । कुच लोग पैस सालओं के लीये पैसा मिंते है । बोलते है की उन्के बेट लड़की को चोडेगा । ये बिल्कुल ठीक नही है । कुच मतलब नही है, बस लोग पैसा के लीये करते है और लड़ की परीवार करती है क्यो की सब डरे है की आदमी की परीवार कुच करेगा । इस लीये, मतलब एक आछा चीज नही है ।

Monday, 2 February 2009

मेरी मनपसंद भारत्या लोक नाच


मेरी मनपसंद लोक नृत्य डंडिया रास है। यह गुजुरत स्टेट कि सबसे मशहूर नृत्य है। यह नवरात्री के समय किया जाता है। डंडिया रास लड़की और लड़को दोनों करते है। अपने हाथो में दो डंडिया पकड़ले है और हम के नाचते है। लड़कियाँ गाग्रा चोली फ्न्थी है और लड़को केडिया और टोपी। कहते है कि डंडिया दुर्गा देवी कि छुड़ी कि जगह में है। लड़कियाँ खुब गहने पहनती है। नृत्य बहुत तेज और खटिं है। इस नृत्य के सात ढोल का इस्तेमाल किया जाता है। में साथ साल से रास कर रही हूँ। में फोगना कौम्पटिशन में हिस्सा लेती थी। मैं कॉलेज में रास टीम में भर्ती होने में खोशिश कि और सफल हुई। मेरे टीम के सात हम मेरी अमेरिका में रास के कौम्पटिशन में हिस्सा लेते है। मुझे रास के कोस्तुमे सबसे पसंद है। मैं आशा करती हूँ कि मैं यह नृत्य बहुत साल टक करूं क्योंकि यह मेरी सबसे मन्पसंढ लोक नृत्य है।